पृथ्वी पर बढ़ता प्रदूषण, चपेट में जीवों का अस्तित्व - मुकेश अमन

Anmolmagazine __ 

प्रदूषण निवारण के लिए ठोस व कारगर कार्यनीति की सख्त जरूरत 

  सम्पूर्ण विश्व में पर्यावरण प्रदूषण की नासूर समस्या से बुरी तरह जुंझ रहा है । वैश्विक स्तर पर प्रदूषण को लेकर हो रहे विभिन्न शोध, अनुसंधान आदि की रिपोर्ट अन्तोतगत्वा यही प्रदर्शित कर रही है कि पृथ्वी प्रदूषण की चपेट में आ चुकी है । 

जिससे निपटने के लिए वृहद स्तर पर कड़े उपायों की सख्त जरूरत है । आज विश्व के प्रत्येक देश में प्रदूषण की समस्या प्रमुखता से उभर रही है । मगर उसके निवारण को लेकर कार्य योजना व प्रयास ना के बराबर होते नजर आ रहे है । जिसके चलते जल, थल व वायु के जीवों के जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा रहा है । यहां तक कि कई जीवों के जीवन पर अस्तित्व का संकट आ खड़ा हो गया है । 

  पृथ्वी पर बढ़ती औद्योगिकता की अंधी दौड़, ई-कचरा, पेट्रोल-डीजल, गैसों का बेपरवाह उपयोग एवं धरती पर घटती वन-सम्पदा ने पर्यावरण में प्रदूषण की बड़ी विकराल समस्या खड़ी कर दी है । वहीं  पृथ्वी पर प्रदूषण तमाम प्रकारों को कम व नियंत्रित करने को लेकर प्रतिवर्ष वैश्विक पटल पर कई सम्मेलन, कानून, नीति-नियम आदि बनाएं जाते है मगर उनको धरातल पर मूल स्वरूप में नही उतार पाते है । जिससे प्रदूषण जैसी जानलेवा समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है । वहीं इस प्रदूषण के चलते विश्वभर में प्रति वर्ष हजारों ंलोगों के साथ-साथ बड़ी तादाद छोटे-बड़े जीवों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है । 

  पृथ्वी पर बढ़ रहे पर्यावरण प्रदूषण के प्रति हम सब हमें सरकारी एवं सामुदायिक स्तर पर नए सिरे से चिन्तन व मन्थन कर उन कारकों पर रोकथाम लगाने के भरपूर प्रयास करने की जरूरत है जिनसे पृथ्वी का पर्यावरण सन्तुलन खतरे में है ।

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